ए इंडिया है जनाब सुधरेगा नहीं

आज सुबह बड़ी जल्दी में अपनी ड्यूटी पर जा रही थी। रास्ते में रेलवे फाटक बन्द था भीड़ जमा थी लोग अपने काम पर जाने की जल्दी में थे। आप सबको पता है करोना का दौर चल रहा है ऐसी महामारी जिससे बचाव के लिए एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना है।ऐ बात हमारे देश की जनता कब सिखेगी?पता है वही पुरानी स्पर्धा एक दूसरे से आगे निकल जाने की। किसी को सोशल डिसटेनसिग का मायने नहीं मास्क लगा लिया तो मानो करोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता☹️
हद तो तब हुयी जब एक मासूम ने अपनी नन्ही हथेली मेरी तरफ़ बढाई ज़रा से सिक्कों के लिए चंद मिनटों वहॉ मौजूद सारे व्यक्ति के पास गयी कुछ ने  मना किया कुछ ने उसकी हथेली  सिक्कों से भर दी ।मेरी आँख भर आयी 😔पता है उस नादान बच्चे की नंगी हथेली और बिना मास्क से ढका मुँह😷 । बार बार हमारी बेपरवाही और बच्चे की किसी बड़ी मजबूरी की तरफ़ इशारा कर रहे थे🙏क्या लोगों को अभी भी पुण्य कमाने की पड़ी है।दान करना है तो ऐसे में उचित ज्ञान का दान करो । फाटक खुलते ही सब अपने म्ंजिल पर चल दिये और वह नन्हा फाटक दुबारा बन्द होने का इंतज़ार करने लगा।✍️

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