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अवशेष

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 🥰है हमसफर वही जो समझ जाते है बिन बोले 😍समझाना है बार बार "उन्हे "जिनका दिल हो ले 😌समझ नही सकते मेरी बात कुछ भी हो ले 🫤समझना नही चाहते बस अपनी ही रट ले मेरे अनुभव  😔समझ के नही समझते उन्हे न अपने निकट ले🤚                 🫠 समझ दुनिया मे सभी अपनी अपनी समझ को सही समझते है हर इंसान सही मानता है खुद को 🌹 जरुरी नही सब आपकी समझ को सही समझे जो आपकी जिन्दगी   को बेहतर बनाते है 🥰🥰⬇️⬇️⬇️ ♥️जो आपकी बातो को बिन बोले समझते है  ♥️और जो आपके दिल से जुडे है शेष तो बस अवशेष है🫠

भीतर ही महफिल✍️ ❣️❣️

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मेरी चाहत ❣️

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मेरा घर

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    मेरी कल्पना मेरे घर का एक कोना जहाॅ सुकून है मेरे घर का एक कोना जहाॅ जनून है मेरे घर का एक कोना जहाॅ मुलाकात है मेरे घर का एक कोना जहाॅ पौधे से भी बात है मेरे घर का एक कोना जहाॅ मिलती मुझे मेरी ही सौगात है सारे कोनो से मिलकर बना मेरा वो कोने का घर मै उसके लिए खास और वो मेरे उसके लिए खास है

अपेक्षा

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 लोगो से अपेक्षा करना सही या ग़लत इस बात का पता अपेक्षा करते वक़्त पता नहीं चलती वरन् जब उसके अवहेलना करने के नज़रिये से पता चलती है। जैसे कभी कभी ग़लत व्यक्ति से अपेक्षा करना  ग़लत व्यक्ति क्या है ऐसा व्यक्ति जिसे हमने अपनी सकारात्मक सोच के कारण सही मान लिया हो और वह हमें अपनी कुटिलता से परिचित नहीं करा रहा हो। हमेशा किसी व्यक्ति से कि जाने वाली अपेक्षा का ज़्यादा होना क्या सही क्या ग़लत बताने या फ़ैसला करने वाला कौन है??  अपनी सोच के आधार पर फ़ैसला करते है क्या हमारी सोच सही है जब स्वयं के मन में इतना मतभेद है तो सबके साथ मनभेद क्यू बढना

बातें जो समझ नहीं आती

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 बाते जो समझ नहीं आती शास्त्र कहते है ईश्वर पर छोड़ दो  विज्ञान कहता है छोड़ो मत समझ कर मानो कुछ नया सोचो लोग कहते है ☺️मारो गोली अपन को क्या  🧐मरने दो भांड में जाय और मैं कहती हुँ🥳समझने समझाने का क्या छोटी सी ज़िन्दगी ख़ुश रहो और रहने दो

ए इंडिया है जनाब सुधरेगा नहीं

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आज सुबह बड़ी जल्दी में अपनी ड्यूटी पर जा रही थी। रास्ते में रेलवे फाटक बन्द था भीड़ जमा थी लोग अपने काम पर जाने की जल्दी में थे। आप सबको पता है करोना का दौर चल रहा है ऐसी महामारी जिससे बचाव के लिए एक दूसरे से दूरी बनाकर रखना है।ऐ बात हमारे देश की जनता कब सिखेगी?पता है वही पुरानी स्पर्धा एक दूसरे से आगे निकल जाने की। किसी को सोशल डिसटेनसिग का मायने नहीं मास्क लगा लिया तो मानो करोना उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता☹️ हद तो तब हुयी जब एक मासूम ने अपनी नन्ही हथेली मेरी तरफ़ बढाई ज़रा से सिक्कों के लिए चंद मिनटों वहॉ मौजूद सारे व्यक्ति के पास गयी कुछ ने  मना किया कुछ ने उसकी हथेली  सिक्कों से भर दी ।मेरी आँख भर आयी 😔पता है उस नादान बच्चे की नंगी हथेली और बिना मास्क से ढका मुँह😷 । बार बार हमारी बेपरवाही और बच्चे की किसी बड़ी मजबूरी की तरफ़ इशारा कर रहे थे🙏क्या लोगों को अभी भी पुण्य कमाने की पड़ी है।दान करना है तो ऐसे में उचित ज्ञान का दान करो । फाटक खुलते ही सब अपने म्ंजिल पर चल दिये और वह नन्हा फाटक दुबारा बन्द होने का इंतज़ार करने लगा।✍️