बचपन आन लाइन हुआ

सालो पाहिले जब भारत में  लोग  कहते थे कि विदेशो में बच्चे मोबाइल और टैबलेट से ऑनलाइन  रहकर  पढ़ लेते है |आश्चर्य होता था बच्चो की शिक्षा दूर बैठे शिक्षक कैसे दे सकते है ?लेकिन आज के परिपेक्ष्य में जब कोरोना जैसी महामारी मुह उठाई खड़ी है तो बहुत उपयोगी सिद्ध हो रही है | ऑनलाइन शिक्षा पर यह  बच्चो की एक उचित उम्र के बाद बच्चो के समझ के दायरे में होती है|
आज विपरीतऔर बिषम  परिस्थितियों के चलते नव कोपलों को इस पद्धति से शिक्षित करना उनके नन्हे हाथो में पेन्सिल की जगह लैपटॉप और मोबाइल के बटन थमा देने जैसा है ||
छोटे बच्चे शिक्षक के हाव भाव औरअपने हम उम्र के साथ खेल कूद कर आधे शिक्षित हो जाते है |शिक्षक का प्यार दुलार पाकर उनकी छवि निखरती है|
आज फिर वही बात सार्थक होती दिखती है कि  बच्चो की पहली पाठशाला उनके माता पिता है |जो शिक्षा उन्हें ऑनलाइन मिलती है| उसे वापस उन बच्चो के अनरूप बनाकर बच्चो को बताना पड़ता है |तरह तरह के प्रलोभन देकर उन्हें पढाई के लिए मानना पड़ता है |कभी तो बच्चे यह भी पूछते है की हमारी वो रगबिरगी किताबे कहा  है ? हमारी बैग पानी की बोतल ?सारे एक जैसे कपडे पहिने हुए मेरे स्कूल के साथी बच्चे? वो झूले खेल कूद मस्ती मुझे कब मिलेगी? ऐ पढाई तो कुछ समझ नहीं आती ?|
ऐ कोरोना कब जाएगा माँ ??
उनके इस अबोध सवालों का जवाब कहा से लाऊ ?
कहते है नन्हे हाथो की दुआओ  में बहुत असर होता है|
|||ईस्वर बहुत जल्द हमारी  सारी परेशानियों को दूर कर दे |||और सब कुछ सामान्य हो जाये |||

Comments

Popular posts from this blog

मेरा घर

karwat leta samay